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ग्रंथों पर हिंदी में बातचीत: कथा, श्लोक, और आज के जीवन में उनका अर्थ। ये एपिसोड हमारे हिंदी अनुवाद से बनाए गए हैं; आवाज़ें AI द्वारा हैं, इसलिए श्लोक हमेशा पाठ में भी देखें।

महाभारत की अनसुनी सीख

महाभारत के कम सुने गए उपदेश, कथा के साथ: यक्ष प्रश्न, भीष्म का मोक्षधर्म, विदुर नीति और सनत्सुजातीय। हर एपिसोड में श्लोक, उनका अर्थ और आज के जीवन से उनका संबंध। अंतः सारथी के हिंदी अनुवाद पर आधारित; आवाज़ें AI द्वारा बनाई गई हैं।

  1. यक्ष प्रश्न, भाग 1: संकट में युधिष्ठिर की स्पष्ट सोच

    श्लोक 1.1–1.37 · 12 मिनट · श्लोक पढ़ें

  2. यक्ष प्रश्न, भाग 2: यक्ष के प्रश्न और युधिष्ठिर का न्याय

    श्लोक 1.38–1.74 · 12 मिनट · श्लोक पढ़ें

  3. मोक्षधर्म 1: शोक में डूबे राजा सेनजित

    श्लोक 12.168.1–12.168.27 · 13 मिनट · श्लोक पढ़ें

  4. मोक्षधर्म 2: पिंगला का जागरण

    श्लोक 12.168.28–12.168.53 · 11 मिनट · श्लोक पढ़ें

  5. मोक्षधर्म 3: मेधावी और बीतते दिन

    श्लोक 12.169.1–12.169.37 · 12 मिनट · श्लोक पढ़ें

  6. मोक्षधर्म 4: शम्याक और अकिंचन का सुख

    श्लोक 12.170.1–12.170.23 · 10 मिनट · श्लोक पढ़ें

  7. मोक्षधर्म 5: मंकि के बछड़े

    श्लोक 12.171.1–12.171.31 · 13 मिनट · श्लोक पढ़ें

  8. मोक्षधर्म 6: मंकि का जागरण, जनक और बोध्य

    श्लोक 12.171.32–12.171.61 · 13 मिनट · श्लोक पढ़ें

  9. मोक्षधर्म 7: अजगर-व्रत वाले मुनि

    श्लोक 12.172.1–12.172.37 · 13 मिनट · श्लोक पढ़ें

  10. मोक्षधर्म 8: गिरे हुए कश्यप और सियार

    श्लोक 12.173.1–12.173.26 · 12 मिनट · श्लोक पढ़ें

  11. मोक्षधर्म 9: उठो, कश्यप

    श्लोक 12.173.27–12.173.52 · 11 मिनट · श्लोक पढ़ें

  12. मोक्षधर्म 10: दम, यानी आत्म-संयम

    श्लोक 12.213.1–12.213.18 · 11 मिनट · श्लोक पढ़ें

  13. मोक्षधर्म 11: जैगीषव्य, निंदा और प्रशंसा में एक-से

    श्लोक 12.222.1–12.222.24 · 12 मिनट · श्लोक पढ़ें

  14. मोक्षधर्म 12: नारद, जिन्हें सब प्रिय मानते हैं

    श्लोक 12.223.1–12.223.23 · 12 मिनट · श्लोक पढ़ें

  15. मोक्षधर्म 13: तपस्वी जाजलि और सिर पर घोंसला

    श्लोक 12.253.1–12.253.26 · 11 मिनट · श्लोक पढ़ें

  16. मोक्षधर्म 14: "मैंने धर्म पा लिया!"

    श्लोक 12.253.27–12.253.51 · 12 मिनट · श्लोक पढ़ें

  17. मोक्षधर्म 15: तुलाधार का तराजू

    श्लोक 12.254.1–12.254.26 · 13 मिनट · श्लोक पढ़ें

  18. मोक्षधर्म 16: अभय का दान

    श्लोक 12.254.27–12.254.52 · 12 मिनट · श्लोक पढ़ें

  19. मोक्षधर्म 17: समंग, जो शोक में भी हल्के रहे

    श्लोक 12.275.1–12.275.21 · 12 मिनट · श्लोक पढ़ें

  20. मोक्षधर्म 18: उलझे हुए गालव, और नारद का सीधा उत्तर

    श्लोक 12.276.1–12.276.29 · 13 मिनट · श्लोक पढ़ें

  21. मोक्षधर्म 19: कहाँ रहें, किनके बीच रहें

    श्लोक 12.276.30–12.276.58 · 12 मिनट · श्लोक पढ़ें

  22. मोक्षधर्म 20: सुनहरा हंस और वचन के बाण

    श्लोक 12.288.1–12.288.45 · 13 मिनट · श्लोक पढ़ें

  23. मोक्षधर्म 21: जनक का प्रश्न, बुढ़ापा और मृत्यु

    श्लोक 12.307.1–12.307.14 · 10 मिनट · श्लोक पढ़ें

  24. मोक्षधर्म 22: नारद का शोक-नाशक उपदेश

    श्लोक 12.317.1–12.317.30 · 13 मिनट · श्लोक पढ़ें